NISHTHA FLN Hindi मॉड्यूल 02 गतिविधि 05 उत्तर एवं सम्पूर्ण गाइड NISHTHA FLN (Hindi) by Diksha Courses - August 31, 2026August 31, 20260 NISHTHA FLN (बुनियादी साक्षरता एवं संख्याज्ञान) प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत मॉड्यूल 02: दक्षता आधारित शिक्षा की ओर बढ़ना भारत में स्कूली शिक्षा को रटंत प्रणाली से मुक्त कर सक्षमता-आधारित शिक्षण प्रतिमान की ओर अग्रसर करता है। यह मॉड्यूल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020), निपुण भारत मिशन (NIPUN Bharat), तथा शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act, 2009) के वैधानिक प्रावधानों पर आधारित है। यह अध्ययन मार्गदर्शिका गतिविधि 05: अपनी समझ की जाँच करें के मूल्यांकन प्रश्न की प्रामाणिक उत्तर कुंजी, तीनों ऐतिहासिक नीतिगत आधारों का विस्तृत विश्लेषण, दक्षता-आधारित शिक्षा के प्रमुख घटकों और DIKSHA प्रमाण-पत्र प्राप्ति की चरणबद्ध प्रक्रिया प्रदान करती है। मॉड्यूल एवं मूल्यांकन अवलोकन मानक / पैरामीटरआधिकारिक विवरणकोर्स का नामNISHTHA FLN (Hindi) — मॉड्यूल 02मॉड्यूल शीर्षकदक्षता आधारित शिक्षा की ओर बढ़नामूल्यांकन का नामगतिविधि 05: अपनी समझ की जाँच करेंमुख्य विषयभारत में दक्षता आधारित शिक्षा (CBE) को समर्थ बनाने वाली परिस्थितियाँनियामक संस्थाNCERT एवं शिक्षा मंत्रालय (MoE), भारत सरकारउत्तीर्ण अंकप्रमाण-पत्र हेतु न्यूनतम 70% अंक अनिवार्य गतिविधि 05: प्रश्न, प्रामाणिक उत्तर एवं नीतिगत विश्लेषण मुख्य प्रश्न: दक्षता आधारित शिक्षा को समर्थ बनाने वाली परिस्थितियाँ प्रश्न: भारत में दक्षता आधारित शिक्षा को समर्थ बनाने हेतु कौन सी तीन परिस्थितियाँ हैं: जब आर टी ई एक्ट 2009 में एक स्वाभाविक शिक्षार्थी के रूप में बच्चों द्वारा ज्ञान का सृजन करने की क्षमता को स्वीकार किया गया और सीखने के प्रक्रिया में शिक्षक की भूमिका की परिकल्पना एक सुगमकर्ता के रूप में की गई। सर्व शिक्षा अभियान प्रारंभ करना। आर टी ई एक्ट 2009 के नियम 23 (2) के संशोधन में यह अनिवार्य कर दिया गया कि “सभी राज्यों के लिए सीखने के प्रतिफल तैयार करने की आवश्यकता है।” ‘सीखने के न्यूनतम स्तर’ विकसित किए गए। एन सी ई आर टी ने कक्षा I–VIII की सभी कक्षाओं और विषयों के लिए सीखने के प्रतिफल विकसित किए। उपर्युक्त में से कौन सा कथन सही है? विकल्प 3, 4 और 1 विकल्प 1, 3 और 5 विकल्प 2 और 3 विकल्प 1, और 3 सही उत्तर: विकल्प 1, 3 और 5 सही उत्तर का विस्तृत नीतिगत एवं ऐतिहासिक विश्लेषण भारत में पारंपरिक शिक्षा व्यवस्था से दक्षता आधारित शिक्षा (Competency-Based Education – CBE) की ओर ऐतिहासिक बदलाव तीन प्रमुख नीतिगत स्तंभों (कथन 1, 3 और 5) द्वारा संभव हुआ: स्तंभ 1: RTE एक्ट 2009 एवं रचनावादी बाल-केंद्रित दृष्टिकोण (कथन 1) बालक एक स्वाभाविक शिक्षार्थी: बच्चों को ‘खाली बर्तन’ (Tabula Rasa) मानने की पारंपरिक धारणा को समाप्त कर यह स्वीकार किया गया कि बच्चे अपने परिवेश, भाषा और अनुभवों के माध्यम से सक्रिय रूप से ज्ञान का सृजन करते हैं। शिक्षक की भूमिका में परिवर्तन: शिक्षक अब ज्ञान का एकमात्र स्रोत नहीं है, बल्कि एक सुगमकर्ता (Facilitator) है जो समृद्ध, सुरक्षित और अन्वेषण-युक्त शिक्षण वातावरण उपलब्ध कराता है। स्तंभ 2: RTE एक्ट 2009 के नियम 23(2) में ऐतिहासिक संशोधन (कथन 3) सीखने के प्रतिफल की अनिवार्यता: वर्ष 2017 में मानव संसाधन विकास मंत्रालय (वर्तमान शिक्षा मंत्रालय) ने RTE नियमों के नियम 23(2) में संशोधन कर यह अनिवार्य किया कि प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश को कक्षा-वार और विषय-वार सीखने के प्रतिफल (Learning Outcomes) परिभाषित और लागू करने होंगे। जवाबदेही का निर्धारण: इस संशोधन ने केवल बच्चों के स्कूल में नामांकन (Access) के स्थान पर वास्तविक सीखने की गुणवत्ता (Quality Learning) को कानूनी जवाबदेही बनाया। स्तंभ 3: NCERT द्वारा कक्षा 1 से 8 तक सीखने के प्रतिफल का विकास (कथन 5) मापने योग्य मानकों का निर्माण: नियम 23(2) के अनुपालन में NCERT ने प्रारंभिक स्तर (कक्षा 1 से 8) के सभी विषयों (भाषा, गणित, पर्यावरण अध्ययन, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान) के लिए सीखने के प्रतिफल का व्यापक दस्तावेज़ तैयार किया। शिक्षकों के लिए मार्गदर्शिका: इन प्रतिफलों ने शिक्षकों को यह स्पष्ट दिशा दी कि किसी पाठ को पढ़ाने के बाद बच्चे में कौन से विशिष्ट ज्ञान, कौशल और दृष्टिकोण का विकास होना चाहिए। कथन 2 और 4 क्यों सही उत्तर में शामिल नहीं हैं? कथन 2 (सर्व शिक्षा अभियान): सर्व शिक्षा अभियान (SSA) का प्राथमिक जोर बुनियादी ढांचे, विद्यालयी पहुंच (Access), और सार्वभौमिक नामांकन पर था। यह सीधे तौर पर आधुनिक दक्षता-आधारित प्रतिफल ढांचे को परिभाषित नहीं करता। कथन 4 (सीखने के न्यूनतम स्तर – MLL): सीखने के न्यूनतम स्तर (Minimum Levels of Learning) 1990 के दशक की संकल्पना थी, जो रटंत और न्यूनतम अंकों पर आधारित थी। वर्तमान मॉडल MLL के स्थान पर समग्र दक्षताओं और विकासात्मक प्रतिफलों पर आधारित है। तुलनात्मक सारणी: पारंपरिक शिक्षा बनाम दक्षता आधारित शिक्षा मूल्यांकन पैरामीटरपारंपरिक पाठ्यपुस्तक आधारित शिक्षणदक्षता आधारित शिक्षा (CBE)केंद्र बिंदुपाठ्यक्रम व पाठ्यपुस्तक समाप्त करनाप्रत्येक बच्चे द्वारा विशिष्ट दक्षता हासिल करनासीखने की गतिकक्षा के सभी बच्चों के लिए एक समानबच्चे की अपनी व्यक्तिगत सीखने की गतिशिक्षक की भूमिकाव्याख्याता एवं निर्देशकसुगमकर्ता (Facilitator) एवं मार्गदर्शकमूल्यांकन का तरीकासत्रांत योगात्मक परीक्षा (अंक/रैंक)सतत रचनात्मक मूल्यांकन (प्रक्रिया व समझ)ज्ञान का स्वरूपरटकर याद की गई अमूर्त जानकारीवास्तविक जीवन में ज्ञान का व्यावहारिक प्रयोग बुनियादी स्तर पर दक्षता के तीन मुख्य घटक दक्षता का त्रि-आयामी ढांचा ├── ज्ञानात्मक पक्ष (Knowledge): अवधारणाओं की स्पष्ट और गहरी समझ ├── कौशलात्मक पक्ष (Skills): कार्य को कुशलतापूर्वक करने की व्यावहारिक क्षमता └── भावात्मक पक्ष (Attitudes & Values): सकारात्मक दृष्टिकोण और सामाजिक-नैतिक मूल्य ज्ञान (Knowledge): विषय-वस्तु और सिद्धांतों का तार्किक बोध। कौशल (Skills): सीखी गई बातों को विभिन्न परिस्थितियों में लागू करने की क्षमता। दृष्टिकोण एवं मूल्य (Attitudes & Values): साथियों के साथ सहयोग, जिज्ञासा और सहानुभूति का प्रदर्शन। DIKSHA पोर्टल पर मूल्यांकन पूर्ण करने की चरणबद्ध प्रक्रिया पोर्टल लॉगिन: आधिकारिक DIKSHA Portal या ऐप पर अपनी पंजीकृत शिक्षक आईडी से लॉगिन करें। मॉड्यूल चयन: My Courses में जाकर NISHTHA FLN (Hindi) के अंतर्गत मॉड्यूल 02 खोलें। गतिविधि 05 खोलें: कोर्स सामग्री में गतिविधि 05: अपनी समझ की जाँच करें पर क्लिक करें। उत्तर सबमिट करें: दिए गए प्रश्न में विकल्प 1, 3 और 5 का चयन करें और Submit बटन दबाएँ। प्रमाण-पत्र डाउनलोड: अंतिम मूल्यांकन में कम से कम 70% अंक प्राप्त होने के 24 से 48 घंटे बाद Profile सेक्शन से अपना डिजिटल प्रमाण-पत्र डाउनलोड करें। अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) 1. RTE एक्ट 2009 के नियम 23(2) का मुख्य उद्देश्य क्या था? RTE नियम 23(2) के संशोधन का मुख्य उद्देश्य प्राथमिक शिक्षा में सीखने के स्तर की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कक्षा-वार ‘सीखने के प्रतिफल’ (Learning Outcomes) को वैधानिक रूप से अनिवार्य बनाना था। 2. दक्षता आधारित शिक्षा में सीखने के प्रतिफल की क्या भूमिका है? सीखने के प्रतिफल शिक्षकों के लिए चेकपॉइंट के रूप में कार्य करते हैं, जिससे वे यह जान पाते हैं कि बच्चे ने अपेक्षित दक्षता प्राप्त की है या उसे अतिरिक्त उपचारात्मक शिक्षण (Remedial Support) की आवश्यकता है। 3. शिक्षक को ‘सुगमकर्ता’ क्यों कहा गया है? सुगमकर्ता के रूप में शिक्षक कक्षा में ऐसा वातावरण तैयार करता है जहाँ बच्चे स्वयं प्रश्न पूछने, प्रयोग करने, खिलौनों से खेलने और गलतियों से सीखने के लिए स्वतंत्र और सुरक्षित महसूस करते हैं।