NISHTHA FLN Hindi मॉड्यूल 02 गतिविधि 03 उत्तर एवं सम्पूर्ण गाइड NISHTHA FLN (Hindi) by Diksha Courses - August 31, 2026August 31, 20260 NISHTHA FLN (बुनियादी साक्षरता एवं संख्याज्ञान) प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत मॉड्यूल 02: दक्षता आधारित शिक्षा की ओर बढ़ना प्राथमिक स्तर के शिक्षकों को रटंत प्रणाली से मुक्त कर सक्षमता-आधारित शिक्षण मॉडल अपनाने के लिए प्रशिक्षित करता है। यह मॉड्यूल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020), निपुण भारत मिशन (NIPUN Bharat), तथा NCERT के बुनियादी शिक्षा ढांचे पर आधारित है। यह अध्ययन मार्गदर्शिका गतिविधि 03: अपनी समझ की जाँच करें के सभी 10 प्रश्नों की प्रामाणिक उत्तर कुंजी, शैक्षणिक विश्लेषण, संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांतों और प्रमाण-पत्र प्राप्ति की चरणबद्ध प्रक्रिया प्रदान करती है। मॉड्यूल एवं मूल्यांकन अवलोकन मानक / पैरामीटरआधिकारिक विवरणकोर्स का नामNISHTHA FLN (Hindi) — मॉड्यूल 02मॉड्यूल शीर्षकदक्षता आधारित शिक्षा की ओर बढ़नामूल्यांकन का नामगतिविधि 03: अपनी समझ की जाँच करेंलक्षित आयु वर्ग3 से 9 वर्ष (बालवाटिका से कक्षा 3 / 5)नियामक संस्थाNCERT एवं शिक्षा मंत्रालय (MoE), भारत सरकारउत्तीर्ण अंकप्रमाण-पत्र हेतु न्यूनतम 70% अंक अनिवार्य त्वरित उत्तर संदर्भ तालिका (Quick Answer Matrix) प्रश्न सं.मुख्य विषयप्रामाणिक उत्तरनीतिगत एवं शैक्षणिक संदर्भ1ज्ञान, कौशल एवं प्रवृत्तियों का मेलd. दक्षता (Competency)समग्र त्रि-आयामी सक्षमता का एकीकृत रूप2दक्षता का व्यावहारिक अनुप्रयोगd. दक्षता (Competency)वास्तविक परिस्थितियों में ज्ञान का क्रियान्वयन3सीखने की प्रगति के मार्गदर्शक बिंदुd. सीखने के प्रतिफल (Learning Outcomes)कक्षा-वार मापने योग्य स्पष्ट मानक4स्वाभाविक शिक्षार्थी द्वारा ज्ञान सृजनa. रचनावादी पद्धति (Constructivism)बाल-केंद्रित सक्रिय ज्ञान निर्माण मॉडल5FLN लक्ष्यों की निगरानी का अधिकारd. राज्य पदाधिकारियों (State Officials)प्रशासनिक मूल्यांकन एवं जवाबदेही ढांचा6गैर-प्रतिक्रियात्मक शिक्षण का मुख्य केंद्रb. बच्चों के सीखने को सुनिश्चित किए बिना पाठ्यक्रम पूरा करनेरटंत आधारित निष्क्रिय शिक्षण विधि7काटना, चिपकाना, मिट्टी व बालू से खेलनाb. सूक्ष्म मांसपेशियों का विकास (Fine Motor Skills)उंगलियों का समन्वय व ग्रिप विकास8FLN फ्रेमवर्क में प्रतिफलों की व्यवस्थाc. सर्पिलाकार (Spiral Progression)अवधारणाओं का क्रमिक और निरंतर दोहराव9प्रोटीन, फैट और कार्बोहाइड्रेट का वर्गीकरणd. स्थूल पोषक तत्व (Macronutrients)शारीरिक वृद्धि एवं ऊर्जा प्रदाता तत्व10RTE एक्ट 2009 का वैधानिक आयु वर्गc. 6-14 वर्ष (6–14 Years)अनुच्छेद 21A के तहत अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा विस्तृत प्रश्नोत्तरी एवं शैक्षणिक विश्लेषण प्रश्न 1: ज्ञान, कौशल और प्रवृत्तियों का एकीकृत स्वरूप प्रश्न: संदर्भ के उपयुक्त ज्ञान, कौशलों और प्रवृत्तियों के मेल को इस रूप में परिभाषित करते हैं: विकल्प: a. दृष्टिकोण | b. सीखने के प्रतिफल | c. कौशल | d. दक्षता सही उत्तर: d. दक्षता (Competency) शैक्षणिक संदर्भ एवं विश्लेषण दक्षता (Competency) केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित नहीं है। यह तीन मूलभूत पक्षों का समग्र संयोजन है: ज्ञानात्मक (Cognitive): विषय-वस्तु का गहन बोध। क्रियात्मक (Psychomotor): कार्य को सटीकता से निष्पादित करने का व्यावहारिक कौशल। भावात्मक (Affective): सकारात्मक दृष्टिकोण, मूल्य और नैतिक व्यवहार। जब कोई शिक्षार्थी इन तीनों का उपयोग किसी वास्तविक समस्या को हल करने के लिए करता है, तो उसे ‘दक्षता’ कहा जाता है। प्रश्न 2: दक्षता की कार्यात्मक परिभाषा प्रश्न: संदर्भ के उपयुक्त ज्ञान, कौशलों और प्रवृत्तियों के मेल को किस क्षमता के रूप में जाना जाता है? विकल्प: a. साक्षरता | b. स्मरण शक्ति | c. मूल्यांकन | d. दक्षता सही उत्तर: d. दक्षता (Competency) शैक्षणिक संदर्भ एवं विश्लेषण दक्षता-आधारित शिक्षा (CBE) में प्रगति का पैमाना समय या कक्षा में उपस्थिति नहीं, बल्कि विद्यार्थी द्वारा प्रदर्शित वास्तविक कार्यकुशलता है। यह शिक्षार्थी को सीखी गई अवधारणाओं को नए और अपरिचित संदर्भों में सफलतापूर्वक लागू करने में समर्थ बनाती है। प्रश्न 3: सीखने के प्रतिफल की भूमिका प्रश्न: बच्चों के सीखने की प्रगति का आकलन करने के लिए शिक्षकों और हितधारकों के मार्गनिर्देशक बिंदु हैं: विकल्प: a. पाठ्यपुस्तक के अध्याय | b. परीक्षा अंक | c. वार्षिक कैलेंडर | d. सीखने के प्रतिफल सही उत्तर: d. सीखने के प्रतिफल (Learning Outcomes) शैक्षणिक संदर्भ एवं विश्लेषण सीखने के प्रतिफल (Learning Outcomes) वे स्पष्ट, गुणात्मक और मापने योग्य कथन हैं जो यह निर्धारित करते हैं कि एक विशिष्ट पाठ, इकाई या कक्षा के अंत में बच्चा क्या जान सकेगा और क्या कर सकेगा। ये शिक्षकों के लिए शिक्षण योजना बनाने और अभिभावकों के लिए बच्चे की प्रगति समझने के दिशा-सूचक (Checkpoints) होते हैं। प्रश्न 4: रचनावादी शिक्षण प्रतिमान प्रश्न: एक स्वाभाविक शिक्षार्थी के रूप में बच्चे की ज्ञान सृजित करने की क्षमता को स्वीकार करना है: विकल्प: a. रचनावादी पद्धति | b. व्यवहारवादी पद्धति | c. पारंपरिक पद्धति | d. सत्तावादी पद्धति सही उत्तर: a. रचनावादी पद्धति (Constructivist Approach) शैक्षणिक संदर्भ एवं विश्लेषण जीन पियाजे और लेव वायगोत्स्की के रचनावाद (Constructivism) के अनुसार, बच्चे खाली बर्तन (Tabula Rasa) नहीं हैं। वे अपने परिवेश, खिलौनों और साथियों के साथ अन्वेषण और अंतःक्रिया करके अपने ज्ञान का निर्माण स्वयं करते हैं। शिक्षक की भूमिका ज्ञान थोपने वाले के बजाय एक ‘सुविधाप्रदाता’ (Facilitator) की होती है। प्रश्न 5: निपुण भारत मिशन के “लक्ष्य” प्रश्न: “लक्ष्यों” को ______________ द्वारा एफ एल एन मिशन की प्रगति की निगरानी करने के रूप में परिभाषित किया गया है: विकल्प: a. केवल अभिभावकों | b. गैर-सरकारी संस्थाओं | c. ग्राम प्रधानों | d. राज्य पदाधिकारियों सही उत्तर: d. राज्य पदाधिकारियों (State Officials) शैक्षणिक संदर्भ एवं विश्लेषण निपुण भारत मिशन के तहत बालवाटिका से कक्षा 3 तक के लिए निर्धारित ‘लक्ष्य’ (Learning Goals/Targets) स्पष्ट रूप से परिभाषित किए गए हैं। इन लक्ष्यों का उपयोग राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर के प्रशासनिक पदाधिकारियों द्वारा स्कूलों में मूलभूत साक्षरता और संख्याज्ञान की प्रगति की वस्तुनिष्ठ निगरानी (Monitoring & Auditing) के लिए किया जाता है। प्रश्न 6: गैर-प्रतिक्रियात्मक शिक्षण की सीमाएं प्रश्न: गैर-प्रतिक्रियात्मक शिक्षण _____________ पर ध्यान केंद्रित करता है: विकल्प: a. बच्चों की समझ विकसित करने | b. बच्चों के सीखने को सुनिश्चित किए बिना पाठ्यक्रम पूरा करने | c. खेल-आधारित गतिविधियों | d. उपचारात्मक शिक्षण सही उत्तर: b. बच्चों के सीखने को सुनिश्चित किए बिना पाठ्यक्रम पूरा करने शैक्षणिक संदर्भ एवं विश्लेषण गैर-प्रतिक्रियात्मक शिक्षण (Non-Responsive Teaching) एक शिक्षक-केंद्रित दोषपूर्ण पद्धति है। इसमें शिक्षक विद्यार्थियों की व्यक्तिगत गति, समझ या सीखने के अंतरालों (Learning Gaps) की परवाह किए बिना केवल पाठ्यपुस्तक और पाठ्यक्रम को समय पर समाप्त करने पर ध्यान केंद्रित करते हैं, जिससे अधिकांश बच्चे पिछड़ जाते हैं। प्रश्न 7: सूक्ष्म क्रियात्मक कौशलों का विकास प्रश्न: गतिविधियाँ जैसे काटना, फाड़ना, चिपकाना, मोती पिरोना, पहेलियाँ जोड़ना, गीली मिट्टी/क्ले, बालू, पानी आदि से खेलने से होता है: विकल्प: a. भाषा का ह्रास | b. सूक्ष्म मांसपेशियों का विकास | c. स्थूल मांसपेशियों की शिथिलता | d. अनुशासनहीनता सही उत्तर: b. सूक्ष्म मांसपेशियों का विकास (Fine Motor Skills Development) शैक्षणिक संदर्भ एवं विश्लेषण सूक्ष्म मोटर कौशल (Fine Motor Skills): हाथों और उंगलियों की छोटी मांसपेशियों का समन्वय। कैंची चलाना, क्ले से आकृतियाँ बनाना और मोती पिरोना पेंसिल पकड़ने (Pincer Grip) और सुलेख के लिए अनिवार्य पूर्व-शर्तें हैं। स्थूल मोटर कौशल (Gross Motor Skills): दौड़ना, कूदना और संतुलन बनाना, जिसमें शरीर की बड़ी मांसपेशियां शामिल होती हैं। प्रश्न 8: सर्पिलाकार पाठ्यचर्या का स्वरूप प्रश्न: एफ एल एन फ्रेमवर्क में सीखने के प्रतिफल व्यवस्थित हैं: विकल्प: a. यादृच्छिक रूप से | b. समानांतर रूप से | c. सर्पिलाकार | d. खंडित रूप से सही उत्तर: c. सर्पिलाकार (Spirally) शैक्षणिक संदर्भ एवं विश्लेषण जेरोम ब्रूनर की स्पाइरल कर्रिकुलम (Spiral Approach) के अनुसार, बुनियादी अवधारणाओं को प्रत्येक कक्षा स्तर पर दोहराया जाता है और हर बार उनकी गहराई और जटिलता को बढ़ाया जाता है। इससे पूर्व-ज्ञान के आधार पर नए ज्ञान का स्थायीकरण होता है। प्रश्न 9: पोषक तत्वों का वर्गीकरण प्रश्न: भोजन में प्रोटीन, फैट और कार्बोहाइड्रेट प्रदान करते हैं: विकल्प: a. सूक्ष्म पोषक तत्व | b. केवल स्वाद | c. रोग प्रतिरोधक दवाएं | d. स्थूल पोषक तत्व सही उत्तर: d. स्थूल पोषक तत्व (Macronutrients) शैक्षणिक संदर्भ एवं विश्लेषण स्थूल पोषक तत्व (Macronutrients): कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा, जिनकी शरीर को अधिक मात्रा में आवश्यकता होती है और जो शारीरिक विकास एवं ऊर्जा के मुख्य स्रोत हैं। सूक्ष्म पोषक तत्व (Micronutrients): विटामिन (A, B, C, D) और खनिज (आयरन, जिंक, आयोडीन), जो रोगों से सुरक्षा और मस्तिष्क के विकास के लिए सूक्ष्म मात्रा में आवश्यक होते हैं। प्रश्न 10: शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act, 2009) प्रश्न: बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (आर टी ई एक्ट) अधिनियम का उद्देश्य _______. आयु के बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा देना है: विकल्प: a. 3-6 वर्ष | b. 0-18 वर्ष | c. 6-14 वर्ष | d. 6-18 वर्ष सही उत्तर: c. 6-14 वर्ष (6–14 Years) शैक्षणिक संदर्भ एवं विश्लेषण भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21A के अंतर्गत अधिनियमित RTE Act, 2009 भारत में 6 से 14 वर्ष के प्रत्येक बच्चे के लिए कक्षा 1 से 8 तक की प्रारंभिक शिक्षा को एक मौलिक अधिकार बनाता है। (नोट: NEP 2020 शैक्षणिक संरचना को 3 से 18 वर्ष तक विस्तारित करती है, किंतु RTE Act 2009 का कानूनी अनिवार्य दायरा 6 से 14 वर्ष का ही है)। तुलनात्मक सारणी: दक्षता बनाम सीखने के प्रतिफल आयामकौशल (Skill)सीखने के प्रतिफल (Learning Outcome)दक्षता (Competency)परिभाषाकिसी विशिष्ट कार्य को करने की शारीरिक या मानसिक क्षमता।स्पष्ट, मापने योग्य विकासात्मक मील का पत्थर।ज्ञान, कौशल और दृष्टिकोण का समग्र व व्यावहारिक अनुप्रयोग।मूल्यांकन का तरीकाकार्य निष्पादन या गति की जाँच।रचनात्मक प्रश्नोत्तरी, रूब्रिक्स व अवलोकन।वास्तविक जीवन की जटिल समस्याओं का समाधान।उदाहरणअक्षरों को सही बनावट में लिखना।4-5 अक्षरों के अपरिचित शब्दों को शुद्धता से पढ़ना।पढ़ी गई कहानी को समझकर अपने शब्दों में व्यक्त करना। Export to Sheets DIKSHA पोर्टल पर मॉड्यूल पूरा करने की प्रक्रिया लॉग इन करें: आधिकारिक DIKSHA Portal या मोबाइल ऐप पर अपने पंजीकृत शिक्षक क्रेडेंशियल से लॉग इन करें। कोर्स का चयन: My Courses में जाकर NISHTHA FLN (Hindi) के अंतर्गत मॉड्यूल 02: दक्षता आधारित शिक्षा की ओर बढ़ना खोलें। सामग्री अध्ययन: सभी वीडियो लेक्चर्स, अध्ययन सामग्री (PDF) और अंतःक्रियात्मक गतिविधियों को पूर्ण करें। मूल्यांकन सबमिट करें: गतिविधि 03: अपनी समझ की जाँच करें खोलें और ऊपर दी गई उत्तर कुंजी के अनुसार उत्तर सबमिट करें। स्कोर सत्यापन: अंतिम मूल्यांकन में कम से कम 70% अंक (न्यूनतम 7/10) सुनिश्चित करें। सर्टिफिकेट डाउनलोड: मूल्यांकन पूर्ण होने के 24 से 48 घंटों के भीतर अपने Profile सेक्शन से डिजिटल प्रमाण-पत्र डाउनलोड करें। अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) 1. दक्षता आधारित शिक्षा (CBE) पारंपरिक शिक्षा से किस प्रकार भिन्न है? पारंपरिक शिक्षा पाठ्यक्रम पूरा करने और परीक्षा में अंकों पर केंद्रित होती है, जबकि दक्षता आधारित शिक्षा प्रत्येक बच्चे द्वारा विशिष्ट कौशलों और अवधारणाओं की वास्तविक समझ और अनुप्रयोग पर केंद्रित होती है। 2. बुनियादी स्तर पर सूक्ष्म मांसपेशियों का विकास (Fine Motor Development) क्यों आवश्यक है? लिखने से पूर्व हाथों और उंगलियों की मांसपेशियों में मजबूती और समन्वय होना आवश्यक है। मिट्टी से खेलने, मोती पिरोने और कागज मोड़ने से बच्चों की पकड़ मजबूत होती है, जिससे वे बिना तनाव के सही ढंग से लिख पाते हैं। 3. निपुण भारत मिशन के अंतर्गत “लक्ष्य” क्या हैं? ‘लक्ष्य’ बुनियादी साक्षरता और संख्याज्ञान के वे न्यूनतम सीखने के मानक हैं जिन्हें बालवाटिका से कक्षा 3 तक के प्रत्येक बच्चे को प्राप्त करना अनिवार्य है।